Shanidev: शनिदेव को न्यायकर्ता कहा जाता है. वे व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं. यदि शनि किसी से प्रसन्न हों तो उस व्यक्ति के जीवन में किसी तरह की कमी नहीं रहती. वहीं यदि शनि किसी से नाराज हो जाएं तो उसे शारीरिक, आर्थिक और मानसिक, तीनों तरह से प्रताड़ित करते हैं. ऐसे व्यक्ति को जीवन में तमाम कष्ट झेलने पड़ते हैं.

लेकिन अगर ऐसे कष्ट के समय समय में व्यक्ति पीपल के वृक्ष की पूजा करे तो उसके जीवन से शनि से जुड़ी पीड़ा समाप्त हो जाती है. शनिवार के दिन पीपल की पूजा करने से शनिदेव से जुड़े कष्टों से व्यक्ति को मुक्ति मिलती है. शनिदेव से खुद कहा है कि जो भी व्यक्ति पीपल की पूजा करेगा, पीपल को स्पर्श करेगा, उसके सारे मनोरथ सिद्ध होंगे. उसे कभी शनि से जुड़े कष्ट नहीं झेलने पड़ेंगे.

जब किसी इंसान पर शनिदेव की महादशा चल रही होती है तो उसे पीपल की पूजा का उपाय जरूर बताया जाता है। कई बार मन में यह सवाल उठता है कि ब्रम्‍हांड के सबसे शक्तिशाली और क्रूर ग्रह शनि का क्रोध मात्र पीपल वृक्ष की पूजा करने से कैसे शान्‍त हो जाता है।

आज हम आपको बताने जा रहे हैं शनि और पीपल से सम्‍बंधित वह पौराणिक कथा जिसके बारे में आपने शायद ही पहले कभी सुना हो।पुराणों की माने तो एक बार त्रेता युग मे अकाल पड़ गया था । उसी युग मे एक कौशिक मुनि अपने बच्चो के साथ रहते थे । बच्चो का पेट न भरने के कारण मुनि अपने बच्चो को लेकर दूसरे राज्य मे रोज़ी रोटी के लिए जा रहे थे।

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रास्ते मे बच्चो का पेट न भरने के कारण मुनि ने एक बच्चे को रास्ते मे ही छोड़ दिया था । बच्चा रोते रोते रात को एक पीपल के पेड़ के नीचे सो गया था तथा पीपल के पेड़ के नीचे रहने लगा था। तथा पीपल के पेड़ के फल खा कर बड़ा होने लगा था। तथा कठिन तपस्या करने लगा था।

एक दिन ऋषि नारद वहाँ से जा रहे थे । नारद जी को उस बच्चे पर दया आ गयी तथा नारद जी ने उस बच्चे को पूरी शिक्षा दी थी तथा विष्णु भगवान की पूजा का विधान बता दिया था।

अब बालक भगवान विष्णु की तपस्या करने लगा था । एक दिन भगवान विष्णु ने आकर बालक को दर्शन दिये तथा विष्णु भगवान ने कहा कि हे बालक मैं आपकी तपस्या से प्रसन्न हूँ। आप कोई वरदान मांग लो।

बालक ने विष्णु भगवान से सिर्फ भक्ति और योग मांग लिया था । अब बालक उस वरदान को पाकर पीपल के पेड़ के नीचे ही बहुत बड़ा तपस्वी और योगी हो गया था।एक दिन बालक ने नारद जी से पूछा कि हे प्रभु हमारे परिवार की यह हालत क्यो हुई है । मेरे पिता ने मुझे भूख के कारण छोड़ दिया था और आजकल वो कहा है।

नारद जी ने कहा बेटा आपका यह हाल शानिमहाराज ने किया है । देखो आकाश मे यह शनैश्चर दिखाई दे रहा है । बालक ने शनैश्चर को उग्र दृष्टि से देखा और क्रोध से उस शनैश्चर को नीचे गिरा दिया । उसके कारण शनैश्चर का पैर टूट गया । और शनि असहाय हो गया था।

शनि का यह हाल देखकर नारद जी बहुत प्रसन्न हुए। नारद जी ने सभी देवताओ को शनि का यह हाल दिखाया था। शनि का यह हाल देखकर ब्रह्मा जी भी वहाँ आ गए थे । और बालक से कहा कि मैं ब्रह्मा हूँ आपने बहुत कठिन तप किया है।

आपके परिवार की यह दुर्दशा शनि ने ही की है । आपने शनि को जीत लिया है। आपने पीपल के फल खाकर जीवंन जीया है । इसलिए आज से आपका नाम पिपलाद ऋषि के नाम जाना जाएगा।और आज से जो आपको याद करेगा उसके सात जन्म के पाप नष्ट हो जाएँगे।

तथा पीपल की पूजा करने से आज के बाद शनि कभी कष्ट नहीं देगा । ब्रह्मा जी ने पिपलाद बालक को कहा कि अब आप इस शनि को आकाश मे स्थापित कर दो। बालक ने शनि को ब्रह्माण्ड मे स्थापित कर दिया।

तथा पिपलाद ऋषि ने शनि से यह वायदा लिया कि जो पीपल के वृक्ष की पूजा करेगा उसको आप कभी कष्ट नहीं दोगे। शनैश्चर ने ब्रह्मा जी के सामने यह वायदा ऋषि पिपलाद को दिया था।

उस दिन से यह परंपरा है जो ऋषि पिपलाद को याद करके शनिवार को पीपल के पेड़ की पूजा करता है उसको शनि की साढ़े साती , शनि की ढैया और शनि महादशा कष्ट कारी नहीं होती है।

शनि की पूजा और व्रत

शनि की पूजा और व्रत एक वर्ष तक लगातार करनी चाहिए। शनि कों तिल और सरसो का तेल बहुत पसंद है इसलिए तेल का दान भी शनिवार को करना चाहिए। पूजा करने से तो दुष्ट मनुष्य भी प्रसन्न हो जाता है।

1. हर शनिवार को पीपल के पेड़ की जड़ को स्पर्श करके प्रणाम करें और शाम के समय सरसों के तेल का दीपक जलाएं और 5 या 9 बार पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करें. ऐसा करने से शनि से जुड़े सारे कष्ट दूर होते हैं. परिवार में सुख समृद्धि आती है.

2. गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है कि वृक्षों में मैं पीपल हूं. श्रीकृष्ण भगवान को शनिदेव अपना इष्टदेव मानते हैं. ऐसे में वे पीपल की पूजा से अत्यंत प्रसन्न होते हैं. यदि आपकी नौकरी में समस्या आ रही है, या सफल नहीं हो पा रहे हैं तो आप हर शनिवार को दूध में गुड़ और पानी मिलाकर पीपल में डालें. आप चाहें तो ये काम रोजाना भी कर सकते हैं. ऐसा करने से व्यक्ति तेजी से सफलता की सीढ़ी चढ़ता है.

3. शनिवार को पीपल का एक पत्ता उठाकर घर लाएं. उस पर इत्र लगाएं और इस पत्ते को अपने पर्स में रख लें. हर महीने पत्ते को बदल लें. ऐसा करने से धन की कभी कोई कमी नहीं रहती है.

4. किसी विशेष मनोकामना की पूर्ति चाहते हैं तो किसी पुराने पीपल के पेड़ के पास जाएं. इस दौरान अपने साथ लाल पेन, थोड़ा लाल कपड़ा और कलावा ले जाएं. साथ में आटे से बना घी का दीपक लेकर जाएं. पीपल के नीचे घी का दीपक जलाएं और सामने खड़े होकर हनुमान चालीसा का पाठ करें.

इसके बाद एक पीपल का पत्ता बिना तोड़े उस पर अपनी कामना को लिखें और पेड़ की डाली पर सात बार कलावा लपेटें. उस कलावे को अपने हाथ पर भी लपेटें. इसके बाद पीपल के पेड़ के पास से थोड़ी सी मिट्टी लें और इसे लाल कपड़े में लपेट लें. फिर इस लाल कपड़े में बंधी मिट्टी को लाकर उस स्थान पर रख दें, जहां आप धन रखते हैं. इससे घर में काफी समृद्धि आती है और हर मनोकामना पूरी हो जाती है.

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