मनाली: संस्कृति और पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए चांगचुप चोलिंग कल्चर एंड वेलफेयर सोसाइटी जांगला ने नई पहल की है। जांस्कर घाटी के दूर दराज क्षेत्र जांगला में एक ऐसा बौद्ध मठ है जहां सिर्फ महिला बोद्ध भिक्षु ही रहती हैं। इन महिला बौद्ध भिक्षु ने पहली बार मनाली में संस्कृति और पर्यावरण पर तीन दिवसीय प्रदर्शनी लगाई है। प्रदर्शनी का शुभारंभ प्रबंधक जनरल लोबसंग नवांग और मनाली मठ के लामा लोबसंग लेगडुप द्वारा किया गया। प्रदर्शनी के मुख्य आकर्षण में मंडला, माने शिलालेख, पांडुलिपि जैसी प्राचीन मठ कला शामिल हैं। इसके अलावा महिला बौद्ध भिक्षु ने संस्कृति और पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए संदेश देने के लिए डिजाइन किए हैं। अपने चित्रों और टी शर्ट को प्रदर्शित किया है। छोटी कलाकारों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। इन महिला बौद्ध भिक्षु ने कचरे से उपयोगी चीजें बनाने में अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित करके एक कदम आगे बढ़ाया है। शरीर और दिमाग को फिट रखने के लिए लोगों को योग के प्राचीन अभ्यास के बारे में जागरूक किया जा रहा है। नन्ही बौद्ध भिक्षु प्रदर्शनी में आने वाले पर्यटकों को हिंदी व अंग्रेजी में अपनी संस्कृति का गुणगान कर रही हैं। पर्यटक भी जांस्कर की संस्कृति की विस्तृत जानकारी ले रहे हैं।
चांगचुप चोलिंग कल्चर एंड वेलफेयर सोसाइटी जांगला की अध्यक्ष लोबजंग नीमा और मठ की अध्यापिका स्टांज़िन ने बताया कि संस्कृति और पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए चांगचुप चोलिंग कल्चर एंड वेलफेयर सोसाइटी जांगला ने मनाली में प्रदर्शनी लगाई है। उन्होंने सहयोग देने के लिए एसडीएम मनाली व नगर परिषद मनाली का आभार जताया।

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